पारमार्थिक दृष्टिकोण से कौन स्वार्थी व कौन परार्थी? / In spiritual context, who is a selfish and who a selfless?

चिन्तनीय तथ्य — “जो केवल निजोद्धार के निमित्त प्रयत्नशील रहता है, वह आध्यात्मिक सन्दर्भ में स्वार्थी कहलाता है। जबकि, जो सतत निजात्मोद्धार से अधिक परात्मोद्धार के लिए प्रयासशील बना हुआ है, वह यहाँ परार्थी माना गया है। प्रमाण — ‘आत्मनस्तु कामाय सर्वम्प्रियम्भवति’ (बृहदारण्यकोपनिषद्) + ‘सर्वे अत्र सुखिनः सन्तु सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु […]

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काश्यागमनसमाचार: । News regarding the tour of Varanasi.

  नवीन समाचार — भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर आचार्य श्री रा.कृ.दा. स्वा. ‘आ.वा.’ गुरुपाद (भ.र.वे.प्र. — आणंद, गुजरात, भारत) विगता लखनवी (अवध क्षेत्र) श्रीमद्भागवती कथा की परिसमाप्ति के पश्चात् अब धर्मनगरी व प्राच्यविद्याकेन्द्रस्वरूपा (ज्ञान/प्रकाश की पुरी स्वरूपिणी) पृथ्वी के प्रथम नगर वाराणसी/काशी/बनारस (पूर्वी उत्तरप्रदेश, भारत) पधार चुके है अग्रिम त्रिदिवसीय कार्यक्रम के लिए। — आज्ञा से जनसम्पर्काधिकारी Latest […]

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Bhaktirasavedantapithadhisvara Acarya Sri Gurupada / भक्तिरसवेदान्तपीठाधीश्वर आचार्य श्री गुरुपाद — Lucknow / लखनऊ — 21.12.2015 AD / २१.१२.२०१५ ई.स्वी. — BRVF / भ.र.वे.प्र.

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Info. about BRVF's preaching. / भ.र.वे.प्र. की प्रचारविषयिणी सूचना ।

सूचना — आचार्य श्री सप्ताह (७ दिवसीय) एवं नवाह (९ दिवसीय) कथाएँ करते है किसी भी प्रकार के पूर्वनिर्धारित व्यावसायिक शुल्क के बगैर तथा भजन/कीर्त्तन के मर्यादित प्रवेश के साथ जो कि तत्त्वज्ञानपरिप्लुता होती है । ये कथायें सस्ते मनोरञ्जन के लिए नहीं, अपितु दिव्यानुभूति के निमित्त होतीं है । ये कथायें श्रीमद्भागवत, वाल्मीकीय रामायण, […]

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श्रीमद्भागवतकथा — गोमती नगर — लखनऊ (उ.प्र., भारत) — प्रथमांश (दिसम्बर २०१५ ई.स्वी.) / Srimadbhagavata-katha — Gomati Nagar, Lucknow City (UP, IN) — Pt. 1 (Dec. 2015 AD)

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Message for 22.12.2015 AD / २२.१२.२०१५ ई.स्वी. का सन्देश

आज का सन्देश – “कोई भी आध्यात्मिक, धार्मिक, राजनैतिक, आर्थिक, कूटनैतिक, व्यावसायिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक व सामाजिक क्रान्ति तभी सही मायने में क्रान्ति कही जा सकती है जब कि वह पूर्णतया सनातनधर्म के मूलशास्त्रो की विचारधारा एवं आशय के अनुगमन में हो तथा यदि वह उन मूल्यो की सुरक्षा व पुनरुत्थान के लिये प्रयासरत हो जो […]

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रागानुगाभक्ति किस प्रकार की शास्त्रापेक्षा से युक्ता है?

अतिरिक्त स्पष्टीकरण — “रागानुगा भक्ति पूर्णतया शास्त्रनिरूपिता/शास्त्राधारितपरिभाषिता व आंशिकरूपेण शास्त्रापेक्षा है। शास्त्रापेक्षत्व त्रिविध है — १) शास्त्रादेशप्रवर्तितत्व, २) शास्त्रविध्यनुगामित्व व ३) शास्त्रवर्णितभगवल्लीलाश्रुतत्व। यदि शास्त्रादेशप्रवर्तितत्व के सन्दर्भ में शास्त्रापेक्षत्व का व्यवहार होता है, तब तो रागानुगा भक्ति वैसे शास्त्रापेक्षत्व से कतही सम्बन्धिता नहीं — ‘…नात्र शास्त्रम् च युक्तिम् च तल्लोभोत्पत्तिलक्षणम्..’ (भ.र.सि.) के आधार पर। यही उसका […]

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Raganuga Sadhana-bhakti – Additional clarification

Additional clarification — A) Raganuga sadhana-bhakti is, certainly, not bound by certain unfavourable rules of vaidhi sadhana-bhakti like dvaraka-mahishi-dhyanam and dvaraka-tapta-mudra-dharanam etc. as mentioned by Srila Visvanatha Chakravartti in his Ragavartmacandrika. But, the Raganuga path is, for sure, governed by its own rules and prohibitions. The example given in RVC of SVCT regarding how a […]

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आज का सन्देश / Today's message

स्पष्टीकरण — “गौडीय वैष्णव सिद्धान्त में अभिधेयतत्त्वालोचनान्तर्गत प्रसङ्ग में रागानुगा साधनभक्ति (पुष्टिमार्ग) व वैधी साधनभक्ति (मर्य्यादामार्ग) — इन दोनों ही मार्गों में शास्त्रोक्ता नियमावली का पालन (कुछ तारतम्य के साथ) अत्यन्त अपरिहार्य है। केवल दोनों मार्गों की प्रवर्त्तनपरिपाटी में तथा उनसे प्राप्य फलों में अन्तर होने के कारण ही वें उभय भिन्ना भिन्ना समाख्या से […]

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